चंडीगढ़: त्योहारों के सीजन से पहले पंजाब सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक में लंबित महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर सहमति बन गई है। सरकार ने डीए में 8 प्रतिशत बढ़ोतरी का फैसला किया है। इसके बाद कर्मचारियों का कुल डीए बढ़कर 50 प्रतिशत हो जाएगा।
चार-चार प्रतिशत की दो किस्तों में मिलेगा बढ़ा हुआ डीए
सरकार के फैसले के अनुसार डीए में हुई 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी को चार-चार प्रतिशत की दो किस्तों में जारी किया जाएगा। खास बात यह है कि बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता इसी महीने के वेतन के साथ कर्मचारियों को मिल जाएगा। फेस्टिवल सीजन से ठीक पहले हुए इस फैसले से कर्मचारियों और पेंशनर्स को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री के साथ बैठक में बनी सहमति
चंडीगढ़ में हुई बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान के अलावा वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा तथा कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर मौजूद रहे। कर्मचारी पक्ष की ओर से विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों के 12 प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया।
बैठक में सांझा फ्रंट ऑफ पेंशनर्स, संयुक्त मुलाजिम मंच, पंजाब सचिवालय एसोसिएशन और पंजाब सिविल सचिवालय ऑफिसर्स एसोसिएशन सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
लंबे समय से चल रही थी डीए की मांग
पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स लंबे समय से लंबित डीए किस्तों और एरियर के भुगतान की मांग कर रहे थे। अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने अगस्त और सितंबर में राज्यव्यापी आंदोलन भी किया था। कर्मचारियों की मांग थी कि महंगाई भत्ता केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार जारी किया जाए।
जालंधर में नहीं हो पाई थी मुख्यमंत्री से बातचीत
डीए समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन के दौरान जालंधर में मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी नेताओं के बीच बातचीत नहीं हो सकी थी। मुख्यमंत्री ने उस समय कहा था कि पहले कर्मचारी हड़ताल खत्म करें, उसके बाद सरकार बातचीत करेगी। हालांकि कर्मचारी संगठन अपनी मांगों पर कायम रहे।
इसके बाद कर्मचारी नेताओं की मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के साथ बैठक हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री के साथ बातचीत का रास्ता खुला और शुक्रवार को चंडीगढ़ में कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई।
अन्य मांगों पर भी हुई चर्चा
डीए बढ़ाने के फैसले के अलावा बैठक में कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। सरकार के इस फैसले के बाद अब कर्मचारियों की बाकी लंबित मांगों पर भी नजर बनी हुई है।
